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पहाड़ों वाली रातें
पहाड़ों वाली रातें कुछ अलग सी ही होती हैं। पहाड़ों के ऊँचे बदन पर बलखाती हुई नीचे रास्ता बनाती नदी
क्यों गुमसुम हो जाते हैं लोग?
क्यों गुमसुम हो जाते हैं लोग? मन के हाथ – पैर समेट कर यूं बैठ जाते हैं। बस खुद में
हमारी अपनी लाडली हिंदी
इन दुनिया में आते ही जो हमे घुट्टी में मिली भाषा होती है वही तो मातृभाषा है। भाषा अकेली नहीं