Stories that Echo our roots
- 1 Views
- Urvi
- December 25, 2020
आवाज़ों, खुशबुओं और यादों को कैसे मिटा पायेगा कोई
आवाज़ों, खुशबुओं और यादों को कैसे मिटा पायेगा कोई। यादें बसी रहती हैं। किसी सामान में, किसी जगह पर, किसी हरकत में … यादें जम जाती हैं। जब हम टूटे – फूटे घरों की कतारें
- 0 Views
- Urvi
- December 24, 2020
ये खतरनाक कशमकश
ये कशमकश बेहद खतरनाक लगती है। दबी हुई छाती महसूस होती है। सांस लेने में तकलीफ़, शरीर सामान्य से थोड़ा ज़्यादा गरम और धीरे-धीरे बढ़ता हुआ सिरदर्द। अपनी पल्स मैं बिना स्टेथोस्कोप के सुन पा
- 0 Views
- December 23, 2020
एक अचूक औषधि!
- 1 Views
- December 22, 2020
क्यों हैं हम इतने बेसब्र?
- 3 Views
- December 21, 2020
आज बहने दिया
- 0 Views
- December 20, 2020
इंसानी वजूद
- 0 Views
- December 19, 2020
जो ऋतु वसंत नही हो पाई, वह ऋतु होने से चूक गई
- 0 Views
- December 18, 2020
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई
- 0 Views
- December 17, 2020
स्त्री
- 1 Views
- December 16, 2020