Posts by: Urvi
- 131 Views
- Urvi
- March 12, 2026
लफ़्ज़: मन से काग़ज़ तक की यात्रा
एहसास की मुंडेर से उड़ते लफ़्ज़ एहसास कि मुंडेर को लांघकर लफ्ज़ जब हवा में शामिल होते हैं … कानों में घुलते से चले जाते हैं और कागज़ कि सतह चूमते हैं तब अनेक खूबसूरत
- 236 Views
- Urvi
- December 1, 2025
दबी छिपी ज़िन्दगी में रवानी का रविवार
ज़्यादा पुरानी बात नहीं है, कुछ साल ही तो हुए हैं। बस्तियां इस तरह फ़ैल गयी हैं दूर दूर तक, हर कहीं -हर जगह। एक दिन सोंचा चलो अपने शहर के नए तेवर ही देख

- 229 Views
- November 22, 2025
दीवार में एक खिड़की रहती है

- 144 Views
- November 21, 2025
अपने नाश्ते को नमन करें

- 139 Views
- November 18, 2025
पुराना शहर – किसी पुरानी फोटो एलबम सा `

- 191 Views
- November 17, 2025
प्रेमचंद की बीते कल की कहानियां आज का किस्सा क्यों बनी हुई हैं?

- 173 Views
- November 15, 2025
Nothing Makes Me Happy Anymore

- 163 Views
- November 14, 2025
Imaginary friend

- 145 Views
- November 13, 2025
सालों को सवांरने कि कोशिशों में तारीखें बिगड़ गई

- 136 Views
- November 12, 2025

