Posts by: Urvi
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- Urvi
- October 18, 2020
पहाड़ों वाली रातें
पहाड़ों वाली रातें कुछ अलग सी ही होती हैं। पहाड़ों के ऊँचे बदन पर बलखाती हुई नीचे रास्ता बनाती नदी जो अपनी आवाज़ से दिखती है। तारों की बारात से रोशन आसमान जैसे कोई त्यौहार
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- Urvi
- October 17, 2020
क्यों गुमसुम हो जाते हैं लोग?
क्यों गुमसुम हो जाते हैं लोग? मन के हाथ – पैर समेट कर यूं बैठ जाते हैं। बस खुद में ही खो जाते हैं। इनसे आप मुलाक़ात भी नहीं कर सकते क्योंकि ये किसी को
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- October 16, 2020
हमारी अपनी लाडली हिंदी

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- October 15, 2020
मज़ा expected में नहीं, मज़ा surprise में है
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- October 12, 2020
पिता
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- October 11, 2020
नींद
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- October 10, 2020
आज तन्हाई बैठी है मेरे साथ
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- October 9, 2020
पेड़
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- October 8, 2020
ऊब
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- October 6, 2020