Posts by: Urvi
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- Urvi
- November 11, 2020
रिश्तों को सिलने की ज़रुरत है
एक छोटा बच्चा था। कोई नौ – दस साल का। अपनी छोटी बहन का फटा जूता मोची के पास लेकर गया था। जूता काफी पुराण था पर सिलवाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था।
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- Urvi
- November 10, 2020
जीवन की धुप छाँव में जीवन संगिनी का समर्पण
यूं ही सुबह होती है और यूं ही हो जाती है शाम। ज़िंदगियां यूं ही चली जा रही हैं। एक बड़ा हिस्सा नौकरी में चला जाता है, ये ख्याल रिटायर होने के बाअद ही आता
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- November 10, 2020
गुनगुनी धूप, गुनगुनाता मन !
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- November 9, 2020
स्त्री हूँ, हारना मना है
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- November 8, 2020
बनाने में घंटों लगते हैं और खाने में कुछ पल ही
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- November 7, 2020
सभी अपनी अपनी यात्रा पे हैं
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- November 6, 2020
ख़ुशी का पता? इन नन्हों से पूछो
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- November 5, 2020
हार
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- November 4, 2020
रिश्ते
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- November 4, 2020