Stories that Echo our roots
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- Urvi
- December 16, 2020
शब्दों के अंबार
मैं कागज़ ले के बैठी हूं, शब्दों के अंबार से कुछ अपने लिए बिन रही हूं। शब्द बहुत ज़्यादा हैं, खुद को खोया हुआ पाती हैं। जैसे मेले में खड़ी एक छोटी बच्ची। बस
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- Urvi
- December 15, 2020
चलिए, कुछ दिन भारत लौट चलें
Immunity की importance के लिए हम आजकल ज़्यादा curious हैं। यूं तो हम कम ही किसी की सुनते हैं पर #corona को avoid नही कर पाए। क्या कुछ दिनों के लिए भारत लौट चलें? हमेशा
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- December 15, 2020
कसक
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- December 15, 2020
हम सभी अपने आप में एक ईमारत हैं
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- December 14, 2020
जब भी आप माँ कहते हैं आप ईश्वर का नाम लेते हैं
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- December 13, 2020
यह वक़्त की दस्तक है, पर दरवाजे बंद रखने हैं
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- December 12, 2020
प्रकृति का प्रकट भाव – बारिश
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- December 11, 2020
वहाँ जहाँ शब्द ना हों
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- December 9, 2020
ज़रा देखिये तो, यह जीने का अंदाज़ कुछ नया – नया सा है
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- December 8, 2020