Stories that Echo our roots
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- Urvi
- October 29, 2020
कोई किसी भी रूप में अकेला नहीं
हर बात किसी न किसी के सापेक्ष होती है। कितने लोग होते हैं, जो कहते हैं की किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। फलां स्थिति में हम अकेले थे, अकेले झूझ रहे थे। जरा सोंच
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- Urvi
- October 28, 2020
सबकी सीमा तय है
अक्सर हम किसी घटना की याद या किसी के व्यवहार अथवा उसकी तरफ से मिले धोखे को लेकर दुखी होते हैं। नाराजगी घेर लेती है, फिर सोंचते भी हैं की अच्छा-भला वक़्त था, ख़त्म क्यों
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- October 27, 2020
बाँसुरी
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- October 26, 2020
हिंसा ऐसे भी होती है
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- October 25, 2020
सुने जाने का भरोसा सबके पास हो
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- October 24, 2020
पिछली बार, कब किसी काम को पहली बार किया था?
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- October 23, 2020
महक और यादें
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- October 22, 2020
क्या बोरियत इतनी बलवान है?
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- October 21, 2020
किंत्सुगी
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- October 20, 2020