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आज तन्हाई बैठी है मेरे साथ
आज तन्हाई बैठी है मेरे साथ। यूं अक्सर हम मिल लेते हैं पर कई बार मुलाकातें नहीं भी हो पाती।
पेड़
जिनके आंगन में, बगीचे में या घर के बाहर, आस – पास कहीं भी पेड़ होता है, या कभी हुआ
ऊब
ऊब का इंतज़ार क्यों करें? हर रोज़ तलाश हो नए मंजरों की। नया अंजाना होता है, इसलिए अक्सर ख़ुशी देता