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ऊब
ऊब का इंतज़ार क्यों करें? हर रोज़ तलाश हो नए मंजरों की। नया अंजाना होता है, इसलिए अक्सर ख़ुशी देता
रेल
रेल की बोगी मानों घरों को खोलकर जोड़ दी गयी एक श्रृंखला होती है, जो एहसास कराती है की मंज़िल
बरसने लगूं बेपरवाह
ख़्वाबों की गलियों में टहलने निकली ही थी की अल्लहड़ बूंदों की तीखी आवाज़ सुन हड़बड़ाई आँखों ने द्वार जो