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कहां हैं वे फूल, वे किताबें कहां हैं?
एक शायर ने लिखा था, “अब के बिछड़े हम शायद ख्वाबों में मिले, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में
पेड़ों को सहलाती बारिश
रिमझिम के गीत सावन गाए कायनात को नहाते हुए देखना जितना सुखद है उतना ही सुहावना है बारिश के बाद का बंधा