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स्त्री हूँ, हारना मना है
शेक्स्पियर ने कहा था की दुनियां एक रंगमंच है। जहां हम सब इस जिंदगी नाम के नाटक में कई तरह
बनाने में घंटों लगते हैं और खाने में कुछ पल ही
बनाने में घंटों लगते हैं और खाने में कुछ पल ही बड़े जतन से बनाती हैं। कभी सुबह से तैयारी
सभी अपनी अपनी यात्रा पे हैं
हम सभी अपनी अपनी यात्रा पे हैं। यही जीवन यात्रा, जहाँ भांति भांति के लोग मिलते हैं और बिछड़ते भी