आवाज़ों, खुशबुओं और यादों को कैसे मिटा पायेगा कोई। यादें बसी रहती हैं। किसी सामान में, किसी जगह पर, किसी हरकत में … यादें जम जाती हैं। जब हम टूटे – फूटे घरों की कतारें