एक छोटा बच्चा था। कोई नौ – दस साल का। अपनी छोटी बहन का फटा जूता मोची के पास लेकर गया था। जूता काफी पुराण था पर सिलवाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था।