जब हम ढूंढने निकलते हैं तो साफ़ नहीं दिखते पर कभी यूं ही मिल जाते हैं रिश्ते। कुछ जुड़ते हैं तो फ़रिश्ते भी बन जाते हैं। और अगर छोड़ा तो कभी कभी साया बन जाते