Posts Tagged: identity
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- Urvi
- December 20, 2020
इंसानी वजूद
इंसानी वजूद में ना जाने कितने रंग के कितने ही धागे हैं जो अंदर ही अंदर आपस में उलझ-सुलझ कर इंसान के बाहरी किरदार पर असर डालते हैं। जिन धागों को कबीर से जुलाहा मिल
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- Urvi
- December 18, 2020
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई की मझे मेरे से बहार सब पहचानने लगे| क्या करूँ? वक़्त की कोई खाली अंगुली पकड़ लूँ| कई बार शब्द पकड़ा तो अर्थ ही छूट गया| अभी उन लम्हों को