कितनी सुलझी हुई सोंच से हमारे संस्कारों में दूसरों के लिए मनौतियां मानना या दूसरों के हिट की प्रार्थना करना शामिल किया गया है। दूजे के हित को ही संस्कार बना दिया। हम में से