अपनी ज़रूरतें (मन की, ego की, लाभ की … आदि ) पूरी करने के लिए दूसरों को नकारते हुए उनके अधिकारों और सम्मान को ठेस पहुँचाना हिंसा ही है। यह भावनात्मक प्रक्रिया है। हम अक्सर