हमारी संस्कृति का मूल प्रकृति और हमारे समन्वय से है। हमारे हर पर्व, परंपरा का आधार प्रकृति ही है। जिन सिद्धांतों पर प्रकृति काम करती है उन्ही पर अपना शरीर भी काम करता है। दूसरी