ख्याल गलियों में भटक रहे हैं। चलिए साथ चलते हैं। मोड़ आएंगे, ख्याल लाएंगे, पर साथ ही रहिएगा। बाहर आने की हड़बड़ाहट है। Lockdown उकताहट दे रहा है। आखिर कब आएंगे बाहर जाने के दिन?