पहाड़ों वाली रातें कुछ अलग सी ही होती हैं। पहाड़ों के ऊँचे बदन पर बलखाती हुई नीचे रास्ता बनाती नदी जो अपनी आवाज़ से दिखती है। तारों की बारात से रोशन आसमान जैसे कोई त्यौहार