खत | यादों में भीगी एक नज़्म
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- Urvi
- January 17, 2021
- Man Ki Baat

हालात यूं हैं कि जब फोन पे आपकी आवाज सुनती हूं तो भर जाती हूं और आवाज उसी में दब जाती है फिर आगे क्या बोलूं वो मुश्किल हो जाता है। आपको ना याद करना, बार बार ख़यालों में ना आने देना, पर क्योंकि ऐसा होता नही है तब जब पल भर में आँखें छलछला उठती हैं यूं अचानक कहीं भी, तब खुद को उसी वक़्त सहज करना भी मुश्किल हो जाता है।
हां, जानती हूं यहां तक मैं ही खुद को लेकर आइ हूं। फिर भी कोस लेती हूं, आपको नही, हालातों को। पता नही कब से महत्वाकांशाएँ मेरे लिए इतनी बड़ी हो गई। आपसे मन लगा लेने के बाद भी मेरे अंदर मेरी महत्वाकांशाओं का प्रभुत्व था जो सदैव बना रहा और अपने बीच पनपते रिश्ते को शुरू से ही कमजोर करता रहा। मुझे हमेशा से लगता था मुझे आज़ाद होना है, घर मुझे एक समय के बाद बंदगी लगने लगा था जिसका जिक्र मैं आपसे करती रहती थी। कुछ समय से लगभग हर बात पर ‘ना’ इतना सुन चुकी थी कि आपसे जिसमे मैं अपना भविष्य देख रही थी, ना नही सुनना चाहती थी।
फिर आप और पिता जी का स्वभाव लगभग एकसा ही है यह जब मुझे समझ में आने लगा तब मैं अपने जीवन में दो पिताओं के प्रति जवाबदेही से चिढ़ने लगी। और इन सब में सरल मन से स्नेह जो आप मुझे दे रहे थे उसकी पूरी कद्र मैंने नही की इसका एहसास अब बखूबी होता है मुझे। और आज जब पूरा विस्तार में सब याद आता है तब दुर्भाग्य किसे कहते हैं, यह समझ आता है।
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YV NAYAKA
18 Jan 2021Didi muje is dard bare kahani kis ke upar liki gayi samaj mein nahi aya par jis kis ke upar ho, behad achhi kahani hai
Urvi
07 Mar 2021Thanks Bhai. I'll share whole story too soon.