फ़िज़ा में तैरती कड़वाहटों में मीठे की तलब और तेज़ हो गयी है। कानों से आह निकलने लगी है नकारात्मक सुनते – सुनते। और फिर जैसे उन बातों से मुँह का रास्ता चुन लिया