रिमझिम के गीत सावन गाए कायनात को नहाते हुए देखना जितना सुखद है उतना ही सुहावना है बारिश के बाद का बंधा समा बारिश कि बूंद जैसे पत्तों के बदन पे लटके हुए मोती पेड की पत्तियों