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- October 11, 2020
नींद
नींद हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा है। कोई बड़ा योगी ही इसके बिना रह सकता है। हम-आप के लिए नींद किसी वरदान से काम नहीं। ऐसा कैसे ? आइये जानें … वे लोग जो
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- October 10, 2020
आज तन्हाई बैठी है मेरे साथ
आज तन्हाई बैठी है मेरे साथ। यूं अक्सर हम मिल लेते हैं पर कई बार मुलाकातें नहीं भी हो पाती। उसे कई औरों से भी मिलने जाना होता है। और इधर मुझसे मिलने भी कुछ
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- October 9, 2020
पेड़
जिनके आंगन में, बगीचे में या घर के बाहर, आस – पास कहीं भी पेड़ होता है, या कभी हुआ करता था, केवल वही बता सकता है इनकी सोहबत का आनंद। आपकी दुनियां में एक
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- October 8, 2020
ऊब
ऊब का इंतज़ार क्यों करें? हर रोज़ तलाश हो नए मंजरों की। नया अंजाना होता है, इसलिए अक्सर ख़ुशी देता है। उन शिकारों को लेकर निकल चलें एक अपनी ही तरह की अनोखी यात्रा पे।
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- October 6, 2020
रेल
रेल की बोगी मानों घरों को खोलकर जोड़ दी गयी एक श्रृंखला होती है, जो एहसास कराती है की मंज़िल पर हम साथ ही पहुंचेंगे। हम जब ट्रेन की यात्रा पर होते हैं तो यह
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- October 3, 2020
बरसने लगूं बेपरवाह
ख़्वाबों की गलियों में टहलने निकली ही थी की अल्लहड़ बूंदों की तीखी आवाज़ सुन हड़बड़ाई आँखों ने द्वार जो खोले तो स्वागत हुआ उस नमी से जो भाप बनकर खिड़की पर बन फिसल रहे
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- October 2, 2020
कहां हैं वे फूल, वे किताबें कहां हैं?
एक शायर ने लिखा था, “अब के बिछड़े हम शायद ख्वाबों में मिले, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले “। दरअसल यह ग़ज़ल उस गुजिश्ता ज़माने की यादगार ग़ज़ल है, जब फूल खिलते
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- September 26, 2020
पेड़ों को सहलाती बारिश
रिमझिम के गीत सावन गाए कायनात को नहाते हुए देखना जितना सुखद है उतना ही सुहावना है बारिश के बाद का बंधा समा बारिश कि बूंद जैसे पत्तों के बदन पे लटके हुए मोती पेड की पत्तियों