“किसने कितनी बात मानी”

हमारा व्यक्तित्व किस तरह का है? कैसी सोच रखते हैं हम? हमारे आसपास का, हमारे शहरों का, गावों का, कस्बों का मिज़ाज कैसा है?
यह एक सच्चाई जो बीते डेढ़ महीने में ज़ाहिर हो गई। कौन कितना ज़िम्मेदार है? अपने परिवार की, समाज की और शहर की उसे कितनी परवाह है? वह देशहित के लिए क्या सोंचता है? इस प्रकार की तमाम बातों का कच्चा-चिटठा इस #lockdown के दौरान हमे पता चला।
वे लोग जो केवल अपने लिए ही जीते हैं, सिर्फ अपना देखते हैं, बाहर घूमते देखे गए। ये लोग कई दुकानों पर भी बेतरतीबी से भीड़ लगाते मिले । बार-बार किये जा रहे आग्रहों और तमाम ज़रियों से मिल रही हिदायतों के बावजूद बिना #mask लगाए मिले। और कइयों ने तो अफ़वाहों, भड़काऊ भाषणों और गन्दी राजनीति करने में भी कोई गुरेज़ नहीं किया।
जिस भीषण विनाशकारी आपदा से पूरी दुनिया जूझ रही है, जो हमरी सबकी जिंदगी को आने वाले लम्बे समय तक प्रभावित करने वाली है, इस आपदा से, इस #corona से, उसकी तेज़ गति से फैलने से, उस से हो रहे और होने वाले नुकसानों से, इन तरह के लोगों का कोई सरोकार हो, ऐसा बिलकुल नहीं लगत।
वहीँ कुछ शहर जल्दी ही संभल गए । मोहल्ले वालों ने रास्ते बंद किये (वे रास्ते जिसे ‘वे लोग’ महज़ तफ़री करने के लिए कई बार तोड़ देते), गाँव वालों ने खुद ही सीमाएं बंद कर ली। उन्होंने अपने लिए और अपने देश के लिए, कोरोना को खदेड़ने के लिए, बताये गए हर निर्देश का पालन किया । साथ ही आज के योद्धाओं का समय – समय पर धन्यवाद दिया। यह सब करके उन्होंने यह साबित कर दिया की जब देश को, समाज को, मानव जाति को, ज़रुरत पड़े तो ये लोग अनुशासित होकर किसी भी आपदा का करारा जवाब दे सकते हैं ।
अंततः घर के भीतर भी, किस पर ज़िम्मेदारियों को लेकर, कितना निर्भर हुआ जा सकता है, यह भी हम-आप समझ गए हैं। हर वो शख्स जो इस संकट काल में अपने शानदार व्यक्तित्व के साथ सामने आए हैं, उन्हें अनेक प्रणाम। नमन है।