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- November 26, 2020
सदा को मिल जाए दोस्ती
जीवनसाथी से रिश्ता दोस्ती में तब्दील होने में समय लगता है। जो शुरू से ही इसकी अहमियत को समझ लिया जाए, तो कड़वाहटें हो ही ना। हम अपने घर के बड़ों के रिश्तों को देखते
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- November 26, 2020
जीवनसाथी वचन निभाना | नए ज़माने में ज़रूरी ये नए वचन भी लें
सात फेरे और सात वचनों के साथ सात जन्मों के साथ का वादा है विवाह। बदलते समय में भी सप्तपदी की यह रस्म कायम है। हांलाकि , चाँद वचन इसमें जोड़न नए वक़्त में रिश्तों
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- November 24, 2020
पर्व के बाज़ार में ज़िंदगी टहलती मिली
पर्व के दौरान बहुत कुछ नया समझने को मिलता है। उत्साह और उमंग के बीच बहुत सारे जीवन अपने -अपने सच को लेकर सामने आते हैं। धीरज हो, तो सुनें। उनकी आवाज़ें, उनकी नज़रें कई
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- November 15, 2020
आधुनिक स्त्री और संतुलित जीवन की तलाश
ऊर्जा का संतुलन हम ‘शिक्षित’ तो हो गए पर आज की इस ‘शिक्षा’ से क्या कुछ हमने पाने की जगह खो दिया। क्या नही लगता हमने खुद को प्रकृति से ही दूर कर लिया
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- November 14, 2020
हमारे अंधेरों को उसके उजाले
पर्व उत्सवी रूप में आते हैं। उत्साह से मनाये जाते हैं। उनका एक अर्थ भी होता है, जिसके मायने जीवन को उत्साह-भरा और उत्सवी बनाते हैं। जब तम से भरी अमावस की रात आती है,
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- November 13, 2020
मन की धूल भी झाड़िए इस दिवाली
इस दिवाली अपने मन के दाग भी साफ़ करें हम दिवाली तब होती है जब हमारे अंदर रौशनी होती है। यह त्यौहार एक-दुसरे को दुआएं देने का, पुराणी बातें, पुराने खाते जो एक-दुसरे के
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- November 12, 2020
जिंदगी हमारी परीक्षा लेती है ताकि हम बदलाव ला सकें
जिंदगी काई बार हमारी परीक्षा लेती है। कई बार वह शरीर की परीक्षा लेती है। यह कोई बिमारी हो सकती है या कोई चोट। फिर जिंदगी विचारों के स्तर पर आपकी परीक्षा लेती है। यह
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- November 11, 2020
रिश्तों को सिलने की ज़रुरत है
एक छोटा बच्चा था। कोई नौ – दस साल का। अपनी छोटी बहन का फटा जूता मोची के पास लेकर गया था। जूता काफी पुराण था पर सिलवाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था।
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- November 10, 2020
जीवन की धुप छाँव में जीवन संगिनी का समर्पण
यूं ही सुबह होती है और यूं ही हो जाती है शाम। ज़िंदगियां यूं ही चली जा रही हैं। एक बड़ा हिस्सा नौकरी में चला जाता है, ये ख्याल रिटायर होने के बाअद ही आता
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- November 10, 2020
गुनगुनी धूप, गुनगुनाता मन !
गुनगुनी धुप, गुनगुनाता मन छांव शरारती, इठलाता तन !! गुलाबी शहर में गुलाबी सर्दी दस्तक दे चुकी है। खिड़की की जालियों से झांकती धूप चेहरे पर अच्छी लग रही है। लम्बी गर्मियों के बाद