Posts Tagged: mindfulness
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- Urvi
- December 18, 2020
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई की मझे मेरे से बहार सब पहचानने लगे| क्या करूँ? वक़्त की कोई खाली अंगुली पकड़ लूँ| कई बार शब्द पकड़ा तो अर्थ ही छूट गया| अभी उन लम्हों को
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- Urvi
- December 11, 2020
वहाँ जहाँ शब्द ना हों
मौन, वहाँ जहाँ शब्द ना हों। यह ज़्यादा प्रभावी अवस्था है। यूँ शब्द भी यहीं से निकलते हैं। साधारण प्रकृति के लोग तो मौन को सहन भी नहीं कर पाते। शब्द अभिव्यक्ति है और
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- December 9, 2020
ज़रा देखिये तो, यह जीने का अंदाज़ कुछ नया – नया सा है
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- December 6, 2020
आपका नज़रिया आपका मानसिक चश्मा है
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- October 30, 2020
यह ‘पॉज’ बटन
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- October 27, 2020
बाँसुरी
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- October 3, 2020