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- November 30, 2020
माँ, तुम सजती हो तो दमकता है उत्सव
कहिये, सच है की नहीं? उत्सव में उमंग तब आता है जब माँ सज-सवंरकर पूजा करती है। ‘अन्नपूर्णा’ की रसोई में जब पकवान महकते है तब लगता है आज उत्सव है। घर के सारे कामों
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- November 30, 2020
उस ओर, जहाँ अच्छा लगता है
करते हैं जिंदगी का ‘सफर’ ज़रा देखिये ‘उनको’ थोड़ा दूर से। भाग रहे हैं, सभी बस भाग रहे हैं। ख्वाइशें खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। पल दो पल चैन से बैठना हम भूल
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- November 29, 2020
और हम प्रभु से बातें करने लगते हैं …
उपासना का मतलब है – पास में बैठना। उप और आसन से मिलकर बना है ये शब्द। उप का मतलब है पास में। आसन का मतलब है आसन लगाना या बैठना। इस में हमारे शरीर
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- November 26, 2020
कौन होता है दरिद्र?
हमारी संस्कृति का मूल प्रकृति और हमारे समन्वय से है। हमारे हर पर्व, परंपरा का आधार प्रकृति ही है। जिन सिद्धांतों पर प्रकृति काम करती है उन्ही पर अपना शरीर भी काम करता है। दूसरी
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- November 26, 2020
सदा को मिल जाए दोस्ती
जीवनसाथी से रिश्ता दोस्ती में तब्दील होने में समय लगता है। जो शुरू से ही इसकी अहमियत को समझ लिया जाए, तो कड़वाहटें हो ही ना। हम अपने घर के बड़ों के रिश्तों को देखते
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- November 26, 2020
जीवनसाथी वचन निभाना | नए ज़माने में ज़रूरी ये नए वचन भी लें
सात फेरे और सात वचनों के साथ सात जन्मों के साथ का वादा है विवाह। बदलते समय में भी सप्तपदी की यह रस्म कायम है। हांलाकि , चाँद वचन इसमें जोड़न नए वक़्त में रिश्तों
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- November 24, 2020
पर्व के बाज़ार में ज़िंदगी टहलती मिली
पर्व के दौरान बहुत कुछ नया समझने को मिलता है। उत्साह और उमंग के बीच बहुत सारे जीवन अपने -अपने सच को लेकर सामने आते हैं। धीरज हो, तो सुनें। उनकी आवाज़ें, उनकी नज़रें कई
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- November 15, 2020
आधुनिक स्त्री और संतुलित जीवन की तलाश
ऊर्जा का संतुलन हम ‘शिक्षित’ तो हो गए पर आज की इस ‘शिक्षा’ से क्या कुछ हमने पाने की जगह खो दिया। क्या नही लगता हमने खुद को प्रकृति से ही दूर कर लिया
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- November 14, 2020
हमारे अंधेरों को उसके उजाले
पर्व उत्सवी रूप में आते हैं। उत्साह से मनाये जाते हैं। उनका एक अर्थ भी होता है, जिसके मायने जीवन को उत्साह-भरा और उत्सवी बनाते हैं। जब तम से भरी अमावस की रात आती है,
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- November 13, 2020
मन की धूल भी झाड़िए इस दिवाली
इस दिवाली अपने मन के दाग भी साफ़ करें हम दिवाली तब होती है जब हमारे अंदर रौशनी होती है। यह त्यौहार एक-दुसरे को दुआएं देने का, पुराणी बातें, पुराने खाते जो एक-दुसरे के