Posts Tagged: self reflection
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- Urvi
- December 18, 2020
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई
मैं इतनी सार्वजनिक हो गई की मझे मेरे से बहार सब पहचानने लगे| क्या करूँ? वक़्त की कोई खाली अंगुली पकड़ लूँ| कई बार शब्द पकड़ा तो अर्थ ही छूट गया| अभी उन लम्हों को
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- Urvi
- December 12, 2020
प्रकृति का प्रकट भाव – बारिश
बारिश में भीगना किसे नहीं पसंद, पर उन बूंदों की झड़ी को खिड़की से निहारना भी कहीं सुखद है। ये अल्हड – बेबाक बूँदें भिगोती हैं ‘ऊर्वी’ को झूमते हुए, प्रकृति के अनोखे रंगों को
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- December 9, 2020
ज़रा देखिये तो, यह जीने का अंदाज़ कुछ नया – नया सा है
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- December 8, 2020
“किसने कितनी बात मानी”
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- December 6, 2020
आपका नज़रिया आपका मानसिक चश्मा है
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- December 4, 2020
आखिर क्यों हैं हम इतने बेसब्र
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- December 2, 2020
जिंदगी भी कभी सर्द हाथों से छू लेती है
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- November 30, 2020
उस ओर, जहाँ अच्छा लगता है
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- November 15, 2020
आधुनिक स्त्री और संतुलित जीवन की तलाश
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- November 13, 2020